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Saturday, January 9, 2021

स्टीव स्मिथ और टिम पेन ने पहले माइंड गेम फिर 'बॉल' गेम से टीम इंडिया को किया चित

जब मेलबर्न टेस्ट जीत कर विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी अपने पास रखी तो सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की हार नहीं थी। टीम इंडिया ने बुरी तरह टूटी ऑस्ट्रेलिया को माइंड गेम में कुचल दिया था। जस्टिन लैंगर उस लम्हे को याद करते हुए कहते हैं - मैच के अगले दिन बीवी के साथ मैं एक रेस्तरां में बैठा हुआ था। मेरी बीवी मेरा हाथ पकड़ कर अचानक रोने लगी। मैंने पूछा ऐसा क्या हुआ। बोली इस मैच के बाद तुम बहुत टूट गए होगे। मेरी बीवी को ये आंसू तेजेश्वर पुजारा के दिए हुए थे जिसने पूरी सीरीज में हमारी नाक में दम कर रखा था। लैंगर के विस्तार से ये बात वेब सिरीज - द टेस्ट - में बताई है।

सिडनी टेस्ट का नतीजा अब स्टीव स्मिथ और लाबुशेन तय करने वाले हैं। चौथे दिन के पहले सेशन में। फिलहाल आपको पीछे ले चलते हैं। तारीख 30 दिसंबर, 2018। बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी के मेलबर्न टेस्ट का आखिरी दिन। महज 27 गेंदों के भीतर मैन ऑफ द मैच रहे जसप्रीत बुमराह और ईशांत शर्मा ने ऑस्ट्रेलिया का खेल तमाम कर दिया। 137 रनों से मिली इस जीत के साथ एक इतिहास लिखा जा रहा था।


India Vs Australia Sydney Test : स्टीव स्मिथ और टिम पेन ने पहले माइंड गेम फिर 'बॉल' गेम से टीम इंडिया को किया चित

जब मेलबर्न टेस्ट जीत कर विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी अपने पास रखी तो सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की हार नहीं थी। टीम इंडिया ने बुरी तरह टूटी ऑस्ट्रेलिया को माइंड गेम में कुचल दिया था। जस्टिन लैंगर उस लम्हे को याद करते हुए कहते हैं - मैच के अगले दिन बीवी के साथ मैं एक रेस्तरां में बैठा हुआ था। मेरी बीवी मेरा हाथ पकड़ कर अचानक रोने लगी। मैंने पूछा ऐसा क्या हुआ। बोली इस मैच के बाद तुम बहुत टूट गए होगे। मेरी बीवी को ये आंसू तेजेश्वर पुजारा के दिए हुए थे जिसने पूरी सीरीज में हमारी नाक में दम कर रखा था। लैंगर के विस्तार से ये बात वेब सिरीज - द टेस्ट - में बताई है।



मेलबर्न के बाद सिडनी में क्या बदला ?
मेलबर्न के बाद सिडनी में क्या बदला ?

फिर मौजूदा सीरीज में क्या बदला? सिडनी टेस्ट के तीसरे दिन ये अंजिक्य रहाणे जरूर सोच रहे होंगे। टीम इंडिया पहले मैच की दुर्गति को पीछे छोड़ मेलबर्न में शानदार वापसी कर सिडनी आई थी। फ्लैट पिच पर इंडिया के जलवे होंगे, हम कमेंट्री बॉक्स से ऐसी कहानियां जडेजा, राजदान, मांजरेकर की जानिब से सुन रहे थे। नतीजा ये हुआ कि ऑस्ट्रेलिया जब पहली पारी में 338 पर पैवेलियन लौटी तो स्टार स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के खाते में सिफर था। वही स्पनिर जो स्टीव स्मिथ को आउट कर हीरो बन चुका था। स्मिथ के बॉग्ड डाउन होने की कहानियों के बीच इसी मैच में हम उन्हें फॉर्म में ले आए। स्मिथ ने शतक ठोक कर अपने इरादे जता दिए।

दरअसल तीसरा टेस्ट खेला तो सिडनी में जा रहा है पर माइंड गेम गाबा का। मौका दिया एक रेस्तरां के बिल ने जहां खाने बैठे थे हमारे कुछ स्टार। एक कहावत है चोर चोरी से जाए हेराफेरी से न जाए। और कंगारु तो माइंड गेम के मास्टर हैं। लैंगर को तो बदला चुकाना ही था। ऑस्ट्रेलियन्स ने चूक नहीं की और बायो बबल के माइंड गेम में इंडिया पर शिकंजा कस दिया।



फिरकी जडेजा की और फंसी भी टीम इंडिया
फिरकी जडेजा की और फंसी भी टीम इंडिया

जब जसप्रीत बुमराह ने मैच की पहली गेंद फेंकी तभी से ऑस्ट्रेलिया ने इरादे जाहिर कर दिए। आक्रामकता और पलट कर वार करने की तैयारी। भले ही डेविड वॉर्नर जैसा खतरनाकर बैट्समैन महज पांच के स्कोर पर चलता हुआ, उनके इरादे नहीं बदले। मोहम्मद शमी होते तो क्या होता इस पर बहस बेमानी है। पर पिछली सिरीज के हीरो बुमराह नई बॉल से खतरनाक नहीं दिखे। हमने ऑस्ट्रेलिया को एक और स्टार बनाने में मदद की। ये हैं विल पुकोवस्की। पहले ही टेस्ट में पुकोवस्की इंडियन फास्ट बोलिंग डिपार्टमेंट पर हावी दिखे। बुमराह को पहली सफलता पुरानी गेंद से मिली।

रवींद्र जेडजा ने अपनी फिरकी से मैच में वापसी कराई। चार विकेट उनके खाते में जाने के बाद शायद हमारे बैट्समैन खयाली पुलाव पकाने में लग गए। तो चूक यहां भी हो गई। नाथन ल्योन को समझने की कोशिश शायद ज्यादा कर बैठे। लगा ऑस्ट्रेलियाई फास्ट बोलिंग के लिए तो कुछ बचा ही नहीं है। जब शुभमन गिल और हिट मैन रोहित शर्मा क्रीज पर आए तो कुछ देर के लिए ये सही भी लगा। गिल ने तेजी से शॉट्स लगाते हुए 50 रन बनाए। वो पैट कमिंस के शिकार बन गए। इसके बाद कहानी तेजी से बदलने लगी।



​बॉडीलाइन बोलिंग के आगे पस्त
​बॉडीलाइन बोलिंग के आगे पस्त

शुरआती विकेट जाने के बाद चेतेश्वर पुजारा दीवार तो बने पर भारतीय बल्लेबाजों की कमजोरी खुल कर सामने आ गई। ऑस्ट्रेलियन कमजोर नस पकड़ लें तो फिर दबाते ही जाते हैं। यही सिडनी की पिच पर हुआ। पैट कमिंस और हेजलवुड की औसत बोलिंग अचानक आग उगलने लगी। उछाल के लिए खेलने गए अजिंक्य रहाणे स्टंप पर बोल मार बैठे। तीसरे दिन के पहले सेशन में बड़े स्कोर की सारी स्कीम फेल हो गई। रहाणे के बाद कमिंस और ग्रीन ने हनुमा विहारी का जीना हराम कर दिया। किसी तरह 24 वीं गेंद पर पहला रहन जुटाने के बाद वो तीन रन और जोड़ सके। प्रेशर टैक्टिक्स में बुरी तरह फंसे विहारी रन आउट होकर वापस लौट गए।

उधर पुजारा बनाम कमिंस का एक और नजारा सिडनी में देखने को मिला। कमिंस ने शॉर्ट बॉल पर छकाया और फुल लेंथ पर स्ट्राइक के लिए मजबूर करते गए। पुजारा ने भी स्टाइल बदला और कुछ तेज शॉट्स लगाकर जवाबी कार्रवाई की लेकिन कमिंस की उस तेजी से उछली गेंद से वो अपना ग्लव्स नहीं हटा सके। ऋषभ पंत टी-20 स्टाइल में शॉट्स तो लगा रहे थे लेकिन बाउंसर का जवाब उनके पास भी नहीं था। हेजलवुड और कमिंस लगातार उनकी बॉडी को निशाना बनाया। चोटिल भी हुए और इसी खीझ में खराब शॉट लगाकर पैवेलियन लौट गए।



​स्विंग नहीं उछाल से पछाड़ा
​स्विंग नहीं उछाल से पछाड़ा

कैमरून ग्रीन, पैट कमिंस और जोस हेजलवुड में से कोई रिवर्स स्विंग नहीं करा पा रहा था। हवा में भी बोल स्विंग नहीं हो रही थी। बस उछाल से उन्होंने छका दिया। जैसे ही इंडियंस बीट होते , कंगारू उन्हें खा जाने के अंदाज में घूरने लगते। इसी माइंड गेम में हम फंसते चले गए। हनुमा विहारी और पुजारा की नीरस बैटिंग का वो स्पेल घटिया बैटिंग रणनीति का हिस्सा था। इस दौरान हम साफ देख सकते थे कि ऑस्ट्रेलियन गेम पर हावी हो रहे हैं। इसका उदाहरण विहारी के पैवेलियन लौटने की अगली गेंद पर ही दिखा। तब रवींद्र जडेजा क्रीज पर आए थे। हेजलवुड की पहली गेंद पर बीट हुए और दोनों के बीच आँखों ही आँखों में जो हुआ वही दरअसल मैच का पासा पलटता है। हेजलवुड को सरजी ने अपने ही अंदाज में जवाब तो दिया पर बाउंड्री लगाने के बाद का जवाब और बीट होने के बाद आंखे तरेरने में फर्क होता है।



​12 साल बाद तीन रन आउट
​12 साल बाद तीन रन आउट

अगर कंगारुओं ने 94 रनों की लीड इस मैच में ली तो इसके पीछे हमारे तीन रन आउट की भी अहम भूमिका रही। हनुमा विहारी, अश्विन और बुमराह ने विकेट फेंक दिया जब एक-एक रन तरकश के तीर की तरह जोड़ने थे। ऐसा 12 साल बाद हुआ जब टीम इंडिया के तीन बैट्समैन एक टेस्ट की एक पारी में रन आउट हुए हों. इससे पहले 2008 में इंग्लैंड के खिलाफ मोहाली टेस्ट में ऐसा हुआ था।



​ब्लॉक होल का रास्ता खोजें बुमराह
​ब्लॉक होल का रास्ता खोजें बुमराह

वॉर्नर और पुकोवस्की के पैवेलियन लौटने के बाद भी दूसरी इनिंग में ऑस्टेलिया ने आक्रामक अंदाज नहीं छोड़ा है। तीन से ज्यादा के औसत से स्टीव स्मिथ और लाबुशेन बैटिंग कर रहे हैं. ऐसे में चौथे दिन का पहले सेशन मैच का रुख पलट सकता है। टीम इंडिया की उम्मीद बूम बूम बुमराह से है। कमिंस जैसी लंबाई न सही पर उनके तरकश में सिर्फ बाउंस नहीं है। उनकी असली ताकत तो डेथ जोन की बोलिंग है। उस ब्लॉक होल का रास्ता उन्हें फिर से खोजना होगा जिसके लिए वो दुनिया भर में कहर बरपाते आए हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ और स्मिथ पहला सेशन खेल गए तो चौथी पारी में बैटिंग कर मैच निकालना रहाणे एंड कंपनी के लिए नामुमकिन होगा।





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