श्रेयस अय्यर बन सकते हैं टीम इंडिया के भरोसेमंद नंबर 4 बल्लेबाज - Game On Live

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Saturday, January 25, 2020

श्रेयस अय्यर बन सकते हैं टीम इंडिया के भरोसेमंद नंबर 4 बल्लेबाज

गौरव गुप्ता, मुंबई मई 23, 2016, बहुत नाराज थे। इतने नाराज वह किसी भी चीज को इतनी ही दूर फेंकते जितना दूर उन्होंने शुक्रवार को टीम साउदी की गेंद पर छक्का लगाकर भारतीय टीम को न्यू जीलैंड के खिलाफ पहले टी20 इंटरनैशनल में जीत दिलाई थी। अय्यर ने 2016-17 के रणजी सीजन की 11 पारियों में 1381 रन बनाए थे। एक सीजन में किसी भी बल्लेबाज द्वारा बनाए गए तीसरे सर्वाधिक रन। लेकिन बावजूद इसके उन्हें जिम्बाब्वे और वेस्ट इंडीज दौरे के लिए चुनी गई टीम में शामिल नहीं किया गया था। फोन नाराजगी में रखने से पहले अय्यर ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा था, 'मैं अभी बात नहीं कर सकता हूं।' पढ़ें, इस बात को अब करीब चार साल का वक्त बीत चुका है। तब मुख्य चयनकर्ता रहे संदीप पाटिल ने बताया कि आखिर क्यों उस युवा बल्लेबाज को तब नजरअंदाज किया गया था। पाटिल ने टीओआई को बताया, 'रणजी और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में काफी फर्क है। आप रणजी में रन बना सकते हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आप उजागर हो जाते हैं। अगर आप पंजाब के सलामी बल्लेबाज जीवनज्योत सिंह का उदाहरण लें, उन्होंने घरेलू क्रिकेट में काफी रन बनाए। अगले साल उन्हें भारत ए टीम के लिए चुना गया लेकिन वह कुछ नहीं कर पाए।' पढ़ें, उन्होंने आगे कहा, 'ऐसा ही कई खिलाड़ियों के साथ हुआ है- अभिनव मुकुंद, सचिन बेबी और मनदीप सिंह भी इसके उदाहरण हैं। सिलेक्टर्स ने सोचा कि दूसरे सीजन में भी अय्यर के प्रदर्शन का इंतजार करते हैं। कई खिलाड़ी पहले सीजन में अच्छा खेलते हैं और अगले सीजन में फ्लॉप हो जाते हैं। अगर आप ऐसे खिलाड़ी को चुनते हैं तो सिलेक्टर एक्सपोज हो जाते हैं। हम चाहते थे कि वह अपने प्रदर्शन में निरंतरता लेकर आएं। हम राहुल द्रविड़ की निगरानी में उन्हें इंडिया ए भेजना चाहते थे।' पाटिल ने कहा, 'अय्यर को लेकर एक और चिंता की बात थी। वह उस समय खराब शॉट खेल देते थे जब गेंदबाज पूरी तरह असहाय नजर आता था। वह उसी तरह 60 और 70 रनों की पारियां खेल रहे थे जैसे युवा रोहित शर्मा खेलते थे। हम उन्हें और समझदार और जिम्मेदार देखना चाहते थे।' आईपीएल की कप्तानी ने बनाया परिपक्वरोहित शर्मा की ही तरह जिम्मेदारी ने अय्यर को परिपक्व बनाने में काफी मदद की। मुंबई इंडियंस की कप्तानी संभालने के बाद रोहित के खेल में एक परिपक्वता और जिम्मेदारी नजर आने लगी। इसी तरह जब गौतम गंभीर ने दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स) की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया तो अय्यर के कंधे पर जिम्मेदारी आई। पाटिल ने कहा, 'इसके बाद उनके खेल में सकारात्मक सुधार आया। कप्तान बनने के बाद वह जिम्मेदार हुए वैसे ही जैसा मुंबई इंडियंस का कप्तान बनने के बाद रोहित शर्मा के साथ हुआ।' ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले दो वनडे इंटरनैशनल में अय्यर जिस तरह मिशेल स्टार्क और एडम जंपा की गेंद पर आउट हुए उसके बाद फिर सवाल उठने लगा कि क्या वह हाई-क्लास गेंदबाजी का सामना कर सकते हैं। लेकिन तीसरे और आखिरी मैच में उन्होंने 35 गेंदों पर 44 रन बनाकर इस संशय को दूर किया। बेंगलुरु में खेली गी उनकी इस पारी ने भारत को सीरीज जीतने में मदद की। अय्यर के निजी कोच प्रवीण आमरे ने कहा, 'ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने आउट होने के तरीके से वह निराश थे। वह किसी भी तरह टीम के लिए योगदान देना चाहते थे। निर्णायक मुकाबले में उनकी पारी बहुत महत्वपूर्ण थी लेकिन फिर भी यह भारत में ही खेली गई थी। विदेशों में विकेट पर अलग तरह से उछाल होता है लेकिन उन्होंने इसके साथ बखूबी सामंजस्य बैठाया।' मानसिक ट्रेनिंग भी जरूरीअय्यर ने स्वयं को मानसिक रूप से दृढ़ बनाने पर भी काफी मेहनत की है। खेल मनोवैज्ञानिक मुग्धा बवारे ने कहा, 'जब वह मुंबई अंडर-16 टीम के साथ थे तब मैंने उनके साथ काम किया है। वह मानसिक रूप से काफी मजबूत हैं। वह बहुत विनम्र और मेहनती खिलाड़ी हैं। वह हमेशा सफलता के लिए प्रयास करते रहते हैं। जब भी मैं उन्हें कोई खास सलाह देती वह उस पर काम करते और अच्छे नतीजे हासिल करते।'


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/30Xki2q

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages