विदेशी धरती पर भारत के 5 ऐसे मौके जब ड्रॉ ने भी जीत सी खुशी - Game On Live

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Tuesday, January 12, 2021

विदेशी धरती पर भारत के 5 ऐसे मौके जब ड्रॉ ने भी जीत सी खुशी

भारत ने सिडनी टेस्ट में दमदार खेल दिखाया। ऑस्ट्रेलिया जो जीत का दावेदार माना जा रहा था- को टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने जीत से महरूम रखा। भारतीय टीम ने ड्रॉ खेला। और यह ड्रॉ किसी लिहाज से जीत से कम नहीं है। एक नजर डालते हैं भारत के ऐसे ही कुछ विदेशी धरती पर खेले गए मुकाबलों पर जहां उसने हार को टालते हुए जीत जैसे ड्रॉ खेले...

नए दौर में हार के मुंह से जीत छीनकर लाना ही सुना जाता है लेकिन टेस्ट क्रिकेट में कई बार हार और जीत से परे ड्रॉ भी काफी मायने रखता है। पांच दिन तक लड़ने के बाद भी कई बार हार-जीत का फैसला नहीं होता और यहां क्रिकेट की जीत होती है।


विदेशी धरती पर भारत के 5 ऐसे मौके जब ड्रॉ ने भी जीत सी खुशी

भारत ने सिडनी टेस्ट में दमदार खेल दिखाया। ऑस्ट्रेलिया जो जीत का दावेदार माना जा रहा था- को टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने जीत से महरूम रखा। भारतीय टीम ने ड्रॉ खेला। और यह ड्रॉ किसी लिहाज से जीत से कम नहीं है। एक नजर डालते हैं भारत के ऐसे ही कुछ विदेशी धरती पर खेले गए मुकाबलों पर जहां उसने हार को टालते हुए जीत जैसे ड्रॉ खेले...



सुनील गावसकर 1979-80 बनाम इंग्लैंड (ओवल)
सुनील गावसकर 1979-80 बनाम इंग्लैंड (ओवल)

भारतीय टीम के सामने 438 रन का लक्ष्य रखा गया। मैच का आखिरी दिन था। किसी ने भारतीय टीम को ज्यादा चांस नहीं दिया था। लेकिन सुनील गावसकर ने अपने टेस्ट करियर की सबसे यादगार पारियों में एक खेली। उन्होंने 221 रन बनाए। चेतन चौहान के साथ पहले विकेट के लिए 213 रन जोड़े। और इसके बाद दूसरे विकेट के लिए दिलीप वेंगसरकर के साथ 153 रन की साझेदारी की। भारत बॉब विलिस, इयान बॉथम और बाएं हाथ के स्पिनर फिल एडमंड्स की टीम के खिलाफ जीत हासिल करने की ओर बढ़ रहा था। गावसकर जब आउट हुए तब भारत को 49 रन की जरूरत थी। टीम हालांकि लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई और मैच ड्रॉ रहा।

स्कोर- इंग्लैंड 305 और 334/8 पारी घोषित

भारत- 202 और 429/8 (गावसकर 221)



सचिन का जलवा- 1990 बनाम इंग्लैंड (ओल्ड ट्रैफर्ड)
सचिन का जलवा- 1990 बनाम इंग्लैंड (ओल्ड ट्रैफर्ड)

इंग्लैंड सीरीज समेटने में लगी थी। भारत का स्कोर छह विकेट पर 183 रन था। भारत के सामने 408 रन का लक्ष्य था। आखिरी दिन भारत के सामने हार का खतरा मंडरा रहा था। लेकिन तब 17 साल के सचिन तेंडुलकर ने यहां मोर्चा संभाला। तेंडुलकर ने काउंटर अटैक की रणनीति अपनाई और शानदार नाबाद शतक लगाया। यह टेस्ट क्रिकेट में उनका पहला शतक था। इस दौरान उन्होंने सातवें विकेट के लिए मनोज प्रभाकर के साथ 160 रन की साझेदार की। भारत ने आखिर मैच बचा लिया।

स्कोर- इंग्लैंड 519 और 320/4

भारत- 432 और 343/6 (तेंडुलकर 119* और प्रभाकर 67*)



टीम ने दिखाया दम- 2001 बनाम साउथ अफ्रीका (पोर्ट एलिजाबेथ)
टीम ने दिखाया दम- 2001 बनाम साउथ अफ्रीका (पोर्ट एलिजाबेथ)

इस मैच में बॉल टैंपरिंग विवाद सामने आया था। मैच रेफरी माइक डेनिस ने सचिन तेंडुलकर और कुछ अन्य क्रिकेटरों पर बॉल टैंपरिंग का आरोप लगाया हुए जुर्माना लगाया था। माहौल काफी गर्म हो गया था। भारत ने सीरीज से हटने तक की धमकी दे दी थी। साउथ अफ्रीका ने एक मुश्किल विकेट पर भारत को 395 रन का लक्ष्य दिया था। भारत को करीब 100 ओवर बल्लेबाजी करनी थी। ऐसा नहीं लगा था कि टीम इंडिया हार को टाल सकती है। लेकिन राहुल द्रविड़ (241 गेंद पर 87 रन) और दीप दासगुप्ता (281 गेंद पर 63 रन) ने मिलकर साउथ अफ्रीका को जीत से महरूम रखा।



धोनी का दूसरा रंग - 2007 बनाम इंग्लैंड (लॉर्ड्स)
धोनी का दूसरा रंग - 2007 बनाम इंग्लैंड (लॉर्ड्स)

इंग्लैंड ने भारत के सामने 380 का टारगेट दिया। भारत को चार सेशन बल्लेबाजी करनी थी। लेकिन महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी बल्लेबाजी का दूसरा रूप दिखाया। उन्होंने आक्रामक बल्लेबाजी को छोड़कर गजब के धैर्य और संयम का परिचय दिया। धोनी ने अपने 76 रन के लिए 150 गेंदों का सामना किया। दूसरे छोर पर विकेट गिर रहे थे लेकिन धोनी टिके रहे। जेम्स एंडरसन, रेयान साइडबॉटम और कंपनी धोनी से पार नहीं पा सकी। भारत अब भी मैच हार सकता था क्योंकि उसके नौ विकेट गिर चुके थे और धोनी के साथ श्रीसंत थे। हालांकि आखिरी सेशन बारिश से धुल गया और टीम ने मैच ड्रॉ करवा लिया।

स्कोर- इंग्लैंड 298 और 282, भारत 201 और 282/9। महेंद्र सिंह धोनी- 76*



गौतम गंभीर की वह यादगार पारी- 2009 बनाम न्यूजीलैंड (नेपियर)
गौतम गंभीर की वह यादगार पारी- 2009 बनाम न्यूजीलैंड (नेपियर)

भारत को फॉलोऑन मिला था। न्यूजीलैंड की मुश्किल परिस्थितियों में बचने की राह मुश्किल नजर आ रही थी। भारतीय टीम को पांच सेशन बल्लेबाजी करनी थी। लेकिन गौतम गंभीर ने हारी बाजी को बचाने का जिम्मा उठाया। गंभीर ने 436 गेंदों पर 137 रन की पारी खेली। उन्होंने 643 मिनट तक बल्लेबाजी की। इसके अलावा राहुल द्रविड़ के 220 गेंद पर 62 रन 242 मिनट तक बल्लेबाजी। सचिन तेंडुलकर के 131 गेंद पर 64 रन औ वीवीएस लक्ष्मण के 212 गेंद पर 124 रन की पारी ने न्यूजीलैंड को जीत से महरूम रखा। भारतीय टीम ने सीरीज में 1-0 से बढ़त बनाए रखी और आखिर में जीत हासिल की।

स्कोर- न्यूजीलैंड 619/9, भारत 305 और 476/4

(गंभीर 137, लक्ष्मण 124*)





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