भारतीय गेंदबाजों ने कैसे लगाई ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी पर लगाम - Game On Live

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Thursday, December 31, 2020

भारतीय गेंदबाजों ने कैसे लगाई ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी पर लगाम

द्वैपायन दत्ता टेस्ट क्रिकेट में रन-रेट बहुत ज्यादा मायने नहीं रखती लेकिन अतीत में ऑस्ट्रेलिया का दौरा करने वाली भारतीय टीमें मेजबान टीम पर लगाम नहीं लगा पाती थीं। इसी वजह से ऑस्ट्रेलिया में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। हालांकि 2018-19 से जब से विराट कोहली की टीम ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीती, तब से ऑस्ट्रेलियाई टीम की रन रेट में काफी गिरावट दर्ज की गई है। पिछली 11 पारियों (2018-19 में आठ और मौजूदा सीरीज में 3) में ऑस्ट्रेलियाई टीम 3 रन प्रति ओवर की दर को सिर्फ एक बार हासिल कर पाई है। वह भी पर्थ में जहां उन्होंने टेस्ट मैच में जीत हासिल की थी। बाकी अन्य पारियों की बात करें तो यह हमेशा तीन से नीचे रही। मौजूदा सीरीज में ऐडिलेड टेस्ट मैच की, जहां ऑस्ट्रेलिया ने आसानी से जीत दर्ज की, दूसरी पारी को छोड़ दिया जाए तो ऑस्ट्रेलिया की रन रेट 2.67, 2 और 2.65 रही है। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज कहीं भी भारतीय गेंदबाजों पर हावी नहीं हो पाए हैं। वहीं अगर 2014-15 की सीरीज की बात करें तो इस दौरान ऑस्ट्रेलिया ने 4.31, 4.21, 3.73, 5.63, 3.73, 3.24, 3.76 और 6.23 रन प्रति ओवर की दर से रन बनाए थे। यह सीरीज ऑस्ट्रेलिया ने 2-0 से जीत हासिल की थी। एक बार भी भारतीय गेंदबाजी आक्रमण ऑस्ट्रेलिया पर लगाम नहीं लगा पाया। कभी-कभी जब भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को दबाव में लाने की भी कोशिश की तब कंगारू टीम ने काउंटर अटैक कर खुद को उस परिस्थिति से बाहर निकाला। 2018-19 में भारतीय टीम के मैनेजर रहे सुनील सुब्रह्मणयन ने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी पर लगाम लगाने के लिए यह भारतीय टीम प्रबंधन का काफी सोचा-समझा प्लान था। टीम प्रबंधन तेज गेंदबाजों को संभालने के लिए काफी वैज्ञानिक सोच अपनाती है।' इसमें विपक्षी टीम के हर खिलाड़ी का अलग-अलग आकलन किया गया। हालांकि सुब्रहम्यन का कहना है कि बीते 20 साल से कॉमन प्रैक्टिस रही है। पूर्व ट्रेनर शंकर बसु द्वारा शुरू की गई DNA टेस्टिंग ने को अपनी पूर्ण क्षमता हासिल करने में काफी मदद की। इस टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर यह नतीजा निकाला गया कि कोई गेंदबाज कितना वर्कलोड संभाल सकता है, वह कितने वक्त तक कितनी रफ्तार से गेंदबाजी कर सकता है। टी नटराजन का ऐक्शन सुधारने वाले और ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के साथ काम करने वाले सुब्रह्मयन ने कहा 'अब शमी जानते हैं कि वह अपने चौथे स्पैल में भी 145 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी का प्रयास कर सकते हैं। बिना ब्रेकडाउन के डर के। यह कुछ ऐसा ही है कि हर गेंदबाज किसी मशीन की तरह गेंदबाजी कर सकता है यह जानते हुए कि उसकी क्षमता कितनी है।' हालांकि पूर्व मैनेजर यह भी मानते हैं कि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी में एक्स-फैक्टर का अभाव है जिसकी वजह से भारतीय टीम को काफी फायदा हो रहा है। 2018-19 में जहां डेविड वॉर्नर और स्टीव स्मिथ टीम का हिस्सा नहीं थे। स्मिथ इस सीरीज में काफी खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं और वॉर्नर चोट के कारण शुरुआती दो मैच नहीं खेल पाए। उन्होंने कहा, 'बाकी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों का रवैया काफी हैरान करने वाला है। उनके खिलाफ योजना तैयार करना आसान है।'


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/2WX0Zoy

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages