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Monday, November 16, 2020

स्मिथ, वॉर्नर की मौजूदगी चुनौतीपूर्ण, लेकिन जीत आसानी से नहीं मिलती: पुजारा

नई दिल्ली और की मौजूदगी ऑस्ट्रेलियाई टीम को मजबूत बनाती है लेकिन को भारत के ‘बेहतरीन’ गेंदबाजों पर पूरा भरोसा है कि वह 2018-19 में टेस्ट सीरीज में मिली सफलता को फिर से दोहरा सकेंगे। उस सीरीज में पुजारा ने तीन शतकीय पारियों की मदद से 500 से ज्यादा रन बनाये थे जिससे भारतीय टीम पहली बार ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर टेस्ट सीरीज को 2-1 से जीतने में सफल रही थी। उस सीरीज में हालांकि स्मिथ और वॉर्नर ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा नहीं थे। दोनों गेंद से छेड़छाड़ के कारण निलंबित थे। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले भारत के इस भरोसेमंद बल्लेबाज ने कहा, ‘यह (ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम) 2018-19 सत्र के मुकाबले थोड़ा मजबूत होगा लेकिन फिर भी जीत आसानी से नहीं मिलती।’ पुजारा का मानना है कि भारत के तेज गेंदबाजों जसप्रीत बुमराह, इशांत शर्मा और मोहम्मद शमी की तिकड़ी 2018-19 की सफलता को फिर से दोहरा सकती है, जिससे घरेलू बल्लेबाजी को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यह टेस्ट सीरीज 17 दिसंबर से शुरू होगी। उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि स्मिथ, वॉर्नर और मार्नस लाबुशेन शानदार खिलाड़ी हैं। लेकिन हमारे मौजूदा गेंदबाजों के बारे में अच्छी बात यह है कि उनमें से अधिकांश पिछली सीरीज में खेले थे और इस बार भी वह उससे अलग नहीं होगा।’ उन्होंने कहा, ‘वे जानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में कैसे सफल होना है क्योंकि उन्होंने अतीत में वहां सफलता का स्वाद चखा है। उनके पास अपने खेल के लिए योजनाएं हैं और अगर हम उसे अच्छी तरह मैदान पर उतरते हैं तो वे स्मिथ, वॉर्नर और लाबुशेन को जल्दी आउट करने में सक्षम होंगे।’ उन्होंने कहा, ‘अगर हम फिर से उस सफलता को दोहरा सके तो हमारे पास टेस्ट सीरीज में जीत दर्ज करने का मौका होगा।’ टेस्ट श्रंखला का पहला मैच डे-नाइट का होगा जो एडीलेड में खेला जाएगा और 77 टेस्ट मैचों में 18 शतक के साथ 5840 रन बनाने वाले इस अनुभवी बल्लेबाज को भी शाम (गोधूलि) के समय खेलने की चुनौती का सामना करना होगा। भारतीय टीम के पास बांग्लादेश के खिलाफ डे-नाइट टेस्ट में खेलने का अनुभव है। उन्होंने कहा, ‘यह एक अलग चुनौती होगी क्योंकि यहां गुलाबी गेंद के साथ अलग तरह की गति और उछाल होगी। हम ऑस्ट्रेलिया में गुलाबी कूकाबूरा से खेलेंगे (बांग्लादेश के खिलाफ, यह गुलाबी एसजी गेंद थी)। यह थोड़ा अलग होगा।’ उनका मानना है कि विदेश में भारतीय टीम के पहले डे-नाइट मैच में खेलने की चुनौती का सामना सामूहिक तौर पर करना होगा। पुजारा ने कहा, ‘एक टीम के रूप में और एक खिलाड़ी के रूप में गुलाबी गेंद और रोशनी का अभ्यस्त होना पड़ेगा। यह थोड़ा अलग होगा। गोधूलि का समय अधिक चुनौतीपूर्ण है लेकिन जैसा कि आप जानते है कि अधिक अभ्यास से आपको इसकी आदत हो जाएगी। इसमें थोड़ा समय लगता है।’ इस 32 साल के खिलाड़ी को उम्मीद है कि ऑस्ट्रेलिया में उनकी टीम इतिहास दोहराने में सफल रहेगी। उन्होंने कहा, ‘आप अपने दम पर मैच नहीं जीत सकते। हां, आप असाधारण प्रदर्शन कर सकते हैं लेकिन आपको जीतने के लिए अन्य खिलाड़ियों के समर्थन की आवश्यकता होती है। यहां तक कि पिछली सीरीज के दौरान भी गेंदबाजी इकाई उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था।’ उन्होंने कहा, ‘टेस्ट जीतने के लिए आपको 20 विकेट लेने होते है और पिछली सीरीज में भी सिर्फ मेरा प्रदर्शन नहीं था, दूसरे बल्लेबाजों ने भी मेरा साथ दिया था। यह टीम की सफलता थी। जब टीम सफल होती है तो वह गर्व का क्षण होता है।’ पुजारा ने इस चुनौतीपूर्ण सीरीज के लिए राजकोट स्थित अपनी अकादमी में पिता एवं कोच ....... की देख-रेख में अभ्यास किया है। उन्होंने कहा, ‘जहां तक मेरा सवाल है, मैं खुश हूं कि मैं अभ्यास के साथ फिटनेस, रनिंग (दौड़) सत्र में भाग ले सका।’


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