नई दिल्ली दिनेश कार्तिक का आज 35वां जन्मदिन है। आज ही के दिन 1985 को उनका जन्म हुआ। जब पार्थिव पटेल की फॉर्म खराब हुई तो कार्तिक को भारतीय टीम में जगह मिली। साल 2004 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में उन्होंने अपना वनडे डेब्यू किया। कार्तिक उस समय लोगों की नजरों में आ गए जब उन्होंने माइकल वॉन को एक हाथ से स्टंप किया था। कुछ महीने बाद तमिलनाडु का यह विकेटकीपर टेस्ट डेब्यू कर रहा था। मुंबई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ। टीम से अंदर-बाहर होते रहे कार्तिक का टेस्ट का सफर हालांकि अच्छे नोट पर शुरू नहीं हुआ। उन्होंने दस टेस्ट मैचों में सिर्फ एक फिफ्टी लगाई। कार्तिक अभी टीम में अपनी जगह पक्की करने की जुगत में ही थे कि पर्दे पर महेंद्र सिंह धोनी की ऐंट्री होती है। साल 2006 में भारत के साउथ अफ्रीका दौरे पर कार्तिक को दोबारा मौका मिलता है। अगले साल 2007 में वह ढाका में अपनी पहली टेस्ट सेंचुरी लगाते हैं। जब ओपनर बनाने की कोशिश हुई ऐसा वक्त भी आया जब कार्तिक को टेस्ट क्रिकेट में बतौर विशेषज्ञ सलामी बल्लेबाज आजमाया जाने लगा। उन्हें कुछ मौके भी दिए गए। हालांकि कार्तिक का प्रदर्शन वहां भी बहुत यादगार नहीं रहा। लेकिन एक बार जब धोनी टीम में पक्के हो गए तो कार्तिक के लिए रास्ते बहुत मुश्किल हो गए। टेस्ट क्रिकेट में भी जब धोनी ने संन्यास लिया तो चयनकर्ताओं ने ऋद्धिमान साहा को तरजीह दी। केकेआर के बने कप्तान कार्तिक हालांकि इसके बाद आईपीएल में अपना जलवा बिखेर रहे हैं। वह आईपीएल के सबसे महंगे खिलाड़ियों में भी शामिल रहे। उन्होने कोलकाता नाइट राइडर्स की कमान भी संभाली। सबसे यादगार पल 2018 में कार्तिक ने अपने करियर की वह पारी खेली जिसे शायद ही वह कभी भूल पाएं। भारत को बांग्लादेश के खिलाफ निदाहास ट्रोफी के फाइनल में 34 रन चाहिए थे। कोलंबो में खेल गए इस मुकाबले में कार्तिक ने 8 गेंद पर 29 रनों की पारी खेली थी। भारत को टी20 मुकाबले के आखिरी दो ओवरों में 34 रन चाहिए थे। कार्तिक ने 19वें ओवर में 22 रन ठोके। इसके बाद आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। इसके बाद कार्तिक को एक नई पहचान मिलनी शुरू हुई- द फिनिशर...
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