सै. अब्बास रिजवी, लखनऊ कोरोना वायरस के इस मुश्किल दौर में एक तरफ जहां ऑस्ट्रेलिया ने भारत से टेस्ट सीरीज के लिए हामी भर दी है वहीं दूसरी तरफ आईसीसी के नए नियम यूपी के पूर्व क्रिकेटरों को हैरान कर रहे हैं। वे इन नियमों को तर्कसंगत नहीं बता रहे हैं। उनके मुताबिक, तेज गेंदबाज तीन से चार स्लिप लेते हैं, ऐसे में सोशल डिस्टैंसिंग का कैसे पालन होगा। कैच लपकने और शॉट रोकने के लिए कई बार फील्डर एक साथ प्रयास करते हैं, तब क्या होगा? इन दिग्गज पूर्व क्रिकेटरों ने नवभारत टाइम्स से बताया कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए बनी गाइडलाइंस में संशोधन की बेहद जरूरत है। बता दें, आईसीसी ने पिछले दिनों 'बैक टू क्रिकेट' के नाम से 16 पेज की गाइडलाइंस जारी की हैं। पढ़ें, पूर्व रणजी खिलाड़ी मजहर अली अंसारी ने कहा कि व्यक्तिगत खेल में सामाजिक दूरी बनाकर रह सकते हैं, पर टीम खेल में नहीं। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में सोशल डिस्टैंसिंग का 100 फीसदी पालन हो पाना नामुमकिन है। ऐसे में सुरक्षा सबसे पहले है। वहीं, पूर्व क्रिकेटर और स्पोर्ट्स सेल कांग्रेस (यूपी) के चेयरमैन अरशी रजा ने कहा, 'पविलियन में खिलाड़ी एक साथ बैठते हैं। हवा में शॉट पड़ती है तो तीन-चार फील्डर उसे लपकने के लिए काफी करीब आ जाते हैं। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग कैसे होगी।' अंडर-14 और 16 क्रिकेट असोसिएशन, लखनऊ के चयनकर्ता मुकेश अग्रवाल ने कहा कि क्रिकेट में बाउंड्री पर कैच पकड़ने में खिलाड़ी एक दूसरे के करीब आ जाते हैं। ऐसे में सोशल डिस्टैंसिंग 100 फीसदी कैसे करेंगे। पढ़ें, यूपी के पूर्व रणजी खिलाड़ी और चयनकर्ता रहे नीरू कपूर ने कहा कि जब तक कोरोना वायरस से पूरी तरह मुक्ति नहीं मिलती है, तब तक आईसीसी को अंतिम निर्देश नहीं जारी करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'स्लिप में कई खिलाड़ी होते हैं। विकेट लेने के बाद खिलाड़ी एक दूसरे के पास जाकर चियरअप करते हैं। ऐसी तमाम चीजें हैं, जिन्हें रोकना नामुमकिन है।' क्या जान से बढ़कर पैसा?यूपीसीए के आजीवन सदस्य गुलाम मोईनुद्दीन ने कहा, 'आईसीसी इतने बुरे माहौल में भी मैच कैसे करवा सकता है। क्या जान से बढ़कर पैसा है। कोरोना वायरस से हर रोज हालात बुरे हो रहे हैं, ऐसे में भविष्य के लिए अभी दिशा निर्देश तय करना जल्दबाजी होगी।' पूर्व जूनियर रणजी क्रिकेटर अभिजीत सिन्हा ने कहा, 'सोशल डिस्टैंसिंग के चक्कर में क्या फील्डर कैच छोड़ दें? हर रोज कोरोना से बचने के लिए डब्ल्यूएचओ निर्देश जारी कर रहा है। ऐसे में आईसीसी को अपनी गाइडलाइंस में संशोधन करे। साथ ही कम से कम दो महीने तक इंतजार करे।'
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