नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यू जीलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में 4-0 की अजेय बढ़त ले चुकी है। इस ऐतिहासिक सीरीज में विराट कोहली ने प्लेइंग इलेवन में बहुत अधिक परिवर्तन नहीं किए। 3 मैचों तक तो कोई बदलाव नहीं था। चौथे मैच में 3 खिलाड़ियों के रूप में बदलाव देखने को मिला, लेकिन युवा विकेटकीपर को मौका नहीं मिला। इसके बाद पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज ने विराट के सिलेक्शन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर पंत विनर हैं तो मौका क्यों नहीं मिल रहा है? आइए आंकड़ों और रेकॉर्ड की तुलना से जानते हैं कि कप्तान, कोच और टीम मैनेजमेंट पंत को बाहर रखने पर क्यों मजबूर हुई... क्या है सबसे बड़ी कमी पंत की सबसे बड़ी कमी यह है कि जब भी टीम को उनसे उम्मीद होती है तो वह कोई खराब शॉट खेलकर अपना विकेट गिफ्ट कर देते हैं। ऐसा नहीं है कि वह अच्छ शुरुआत नहीं करते, लेकिन उसे विनिंग पारी में बदलने में कामयाब नहीं हो रहे हैं। ऐसा आईपीएल में भी देखने को मिला था और लगातार इंटरनैशनल लेवल पर भी होता आ रहा है। तमाम सवालों के बाद भी कप्तान विराट कोहली, कोच रवि शास्त्री और बीसीसीआई प्रमुख सौरभ गांगुली ने पंत का न केवल बचाव किया, बल्कि लगातार खिलाते रहे। क्यों परिवर्तन को मजबूर विराट और टीम मैनेजमेंटदरअसल, टी-20 वर्ल्ड कप अक्टूबर-नवंबर में ऑस्ट्रेलिया की मेजबानी में होगा। टीम इंडिया के पास प्रमुख खिलाड़ी और टीम कॉम्बिनेशन चुनने के लिए बहुत कम समय रह गया है। चूंकि पंत लगातार फ्लॉप हो रहे हैं तो विराट कोहली को संजू सैमसन को मौका देना पड़ा। सैमसन भी उसी राह चले और श्रीलंका के खिलाफ 6 और न्यू जीलैंड के खिलाफ 8 रन पर रवाना हो गए। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुंबई वनडे में पंत को हेल्मेट पर गेंद लगी और मैच में केएल राहुल ने विकेटकीपिंग संभाली। यह विराट कोहली के लिए 'तुरुप का इक्का' साबित हुआ। विराट ने तय किया कि केएल राहुल ही आगे भी विकेटकीपिंग करेंगे। बेजोड़ फॉर्म में चल रहे राहुल ने विकेट के पीछे की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई तो विराट को मनीष पांडे को प्लेइंग इलेवन में शामिल करने का मौका भी मिल गया, जो विनिंग पारी खेलते दिखे। T20 में अगस्त 2019 के बाद से फिफ्टी नहींपंत के टी-20 इंटरनैशनल क्रिकेट करियर की बात करें तो उन्होंने कुल 28 मैच खेले हैं और 25 पारियों में 410 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके नाम दो अर्धशतक है, जबकि उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नाबाद 65 रन है। यह उन्होंने 6 अगस्त, 2019 को वेस्ट इंडीज के खिलाफ बनाया था। इसके बाद से वह कोई भी पचासा नहीं जड़ से हैं। उन्होंने 8 पारियों में क्रमश: 4, 19, 27, 6, 18, 33*, 0 और 1* रन बनाए हैं, जो कतई प्रभावित नहीं करता। 16 वनडे में एक अर्धशतकअब बात करते हैं वनडे की। पंत ने 16 वनडे खेले हैं और कुल 374 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके नाम एक अर्धशतक है, जो उन्होंने वेस्ट इंडीज के खिलाफ 15 दिसंबर, 2019 को चेन्नै में बनाया था। उस 71 रन से पहले और बाद में उनके नाम कोई बड़ी पारी नहीं है। कई बार वह टॉप ऑर्डर में खेलने आए, लेकिन अच्छी शुरुआत के बाद खराब शॉट खेलकर पविलियन लौट गए। विकेटकीपिंग पर भी सवालऋषभ पंत की सबसे बड़ी यूएसपी उनकी विस्फोटक बैटिंग रही है। वह चौके-छक्के की बौछार के लिए जाने जाते हैं। उन्हें एमएस धोनी के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा था। बावजूद इसके विकेटकीपिंग में उनका प्रदर्शन हमेशा से सवालों में रहा। वह कई अहम मौके गंवाते दिखे। विराट कोहली ऐंड कंपनी को उम्मीद थी कि वह बैटिंग टेस्ट क्रिकेट इतना प्रभावी प्रदर्शन वनडे और टी-20 में भी करेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। लाइन में विकेटकीपरों की फौज हैइसमें कोई शक नहीं है कि पंत लिमिटेड ओवर में विकेटकीपर के तौर पर विराट की पहली पसंद थे। संजू सैमसन, श्रीकर भारत, ईशान किशन और अंकुश बैस जैसे कई अन्य युवा विकेटकीपर भी हैं तो इंटरनैशनल टीम में अपने लिए मौका तलाश रहे हैं। इनके अलावा ऋद्धिमान साहा और केएल राहुल भी विराट कोहली के पास विकल्प हैं। धोनी वर्ल्ड कप के बाद से आराम कर रहे हैं अगर उनकी वापसी होती है तो पंत या किसी अन्य के लिए विकेटकीपर के तौर पर खेलना नामुमकिन ही होगा।
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