कराचीस्पॉट फिक्सिंग के कारण आजीवन प्रतिबंध झेल रहे लेग स्पिनर दानिश कनेरिया ने शनिवार को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और देश की सरकार पर नए आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रतिबंध लगने के बाद इन दोनों ने उनकी कोई मदद नहीं की। कनेरिया ने ट्विटर पर लिखा, ‘यह सच है कि मेरे कबूलनामे के बाद मुझे पाकिस्तान सरकार या बोर्ड से किसी तरह का समर्थन नहीं मिला जबकि मेरी ही जैसी स्थिति से निकले अन्य खिलाड़ी पाकिस्तान के लिए खेल रहे हैं। वो भी पीसीबी के समर्थन के साथ और उन्हें सम्मान भी दिया जा रहा है।’ 39 साल के इस खिलाड़ी ने हालांकि कहा है कि पाकिस्तान की जनता ने उनसे कभी मुसलिम प्रधान देश में हिन्दु होने पर सौतेला व्यवहार नहीं किया। कनेरिया ने लिखा, ‘पाकिस्तान के लोगों ने हालांकि मेरे साथ कभी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया। मुझे इस बात पर गर्व है कि मैं पाकिस्तान के लिए पूरी ईमानदारी से खेल सका। अब यह मेरे देश की सरकार, इमरान खान, पीसीबी का मसला है, मेरा भविष्य उनके हाथ में है।’ पढ़ें- भेदभाव हुआ, पर मुद्दा नहीं बनायाइससे पहले कनेरिया ने शुक्रवार को कहा था कि कुछ खिलाड़ी पीठ पीछे उनको लेकर टिप्पणियां करते थे। उन्होंने कहा था, ‘मैंने कभी इसे मुद्दा नहीं बनाया। मैंने केवल उन्हें नजरअंदाज किया क्योंकि मैं क्रिकेट पर और पाकिस्तान को जीत दिलाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहता था।’ कनेरिया ने कहा था, ‘मुझे हिन्दू और पाकिस्तानी होने पर गर्व है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि पाकिस्तान में हमारे क्रिकेट समुदाय को नकारात्मक तरीके से पेश करने की कोशिश न करें क्योंकि बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने मेरा पक्ष लिया और मेरे धर्म के बावजूद मेरा समर्थन किया।’ दबाव में यूसुफ ने धर्म परिवर्तन किया? कनेरिया से जब पूर्व बल्लेबाज यूसुफ योहाना (बाद में ) के बारे में पूछा गया जो ईसाई थे लेकिन बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया था, उन्होंने कहा कि वह किसी की निजी पसंद पर टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘मोहम्मद यूसुफ ने जो किया यह उनका निजी फैसला था, मुझे कभी धर्म परिवर्तन की जरूरत महसूस नहीं हुई क्योंकि मेरी इसमें आस्था है और कभी मुझ पर दबाव भी नहीं बनाया गया।’ पढ़ें- इंजमाम ने हमेशा समर्थन कियाकरियर में 61 टेस्ट खेलने वाले इस लेग स्पिनर ने स्पष्ट किया था कि पूर्व कप्तान इंजमाम उल हक ने हमेशा उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा था, ‘इंजमाम ने मुझे मैच विजेता कहा था। मैं कह सकता हूं कि कई संस्थानों ने मेरे करियर को संवारने में मेरी मदद की। मैंने इंजमाम को सही साबित करने के लिए हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। सच्चाई यह है कि मुझे पाकिस्तानी होने पर गर्व है।’
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