सबी हुसैन, नई दिल्लीकेंद्रीय खेल मंत्री ने कहा है कि यह सरकार और खेल मंत्रालय का काम है कि वह भारतीय ओलिंपिक संघ (आईओए) और राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) सहित सभी हितधारकों के लिए स्वीकार्य खेल नीति तैयार करे, ना कि अदालतों का। रिजिजू ने शुक्रवार को यह टिप्पणी की, जब खेल सचिव राधेश्याम जुलानिया ने मंत्रालय की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया। इसमें उन्होंने कोर्ट को मंत्रालय के 'खेल में सुशासन के लिए राष्ट्रीय संहिता मसौदा 2017’ को स्वीकार करने के आरक्षण के बारे में सूचित किया। इसे स्वीकार करने के लिए तर्क दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आईओसी) द्वारा आईओए और एनएसएफ की स्वायत्तता और स्वतंत्रता से सीधे संबंध के तौर पर संहिता में कई प्रावधानों को स्वीकार करने की संभावना है। पढ़ें, ऐथलीटों को हो सकता है नुकसानजुलानिया ने तर्क दिया कि आईओसी का ओलिंपिक चार्टर एनओसी और एनएसएफ को स्वायत्तता प्रदान करता है और यह कि 'तोक्यो ओलिंपिक और अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारतीय बैनर के तहत प्रतिस्पर्धा वाले ऐथलीटों को वंचित रखने का जोखिम है, यदि संहिता के वर्तमान रूप को अधिकार दिया गया।' 'अदालत नहीं तय करेगी'रिजिजू ने कहा कि मंत्रालय ने 2017 कोड को खारिज कर दिया है और यह मसौदा देश में 'खेलों को बढ़ावा देने' के अनुकूल नहीं है। उन्होंने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, 'मंत्रालय ने मसौदे को स्वीकार नहीं किया है। अदालत यह तय नहीं करेगी कि संहिता कैसी होनी चाहिए। मंत्रालय को अदालत का नोटिस मिला था, इसलिए हम अदालत को (मंत्रालय के रुख के बारे में) बताने के लिए बाध्य थे।' पढ़ें, मंत्रालय ने दी जानकारी उन्होंने कहा, 'खेल नीति को सरकार द्वारा तैयार किया जाएगा, ना कि कोर्ट द्वारा।' कोड को खारिज करते हुए मंत्रालय ने अदालत को सूचना दी कि इसे देश के अंतरराष्ट्रीय दायित्वों और राष्ट्रीय खेल नीति के साथ तालमेल वाला नहीं पाया गया। कोर्ट में दिया हलफनामाहलफनामा में कहा गया है, 'कोड वर्तमान आवश्यकताओं के साथ-साथ भारतीय खेल की भावी आकांक्षाओं को पूरा नहीं करता है। मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल नीति, भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं, विभिन्न खेल विषयों के विकास और मौजूदा खेल अवसंरचना के संदर्भ में कोड की जांच की। यह खेल संस्थाओं, राज्य सरकारों और निजी निवेश को आगे बढ़ाने में विफल साबित हुआ जिससे खेल के कल्चर और उनमें उत्कृष्टता हासिल करने के दोहरे उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके।' पढ़ें, बीसीसीआई को लेकर आकलनऐसा माना जा रहा है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के कामकाज के लिए संशोधित संस्करण को और अधिक अनुकूल बनाने को मंत्रालय ने 2017 कोड लागू करने का विरोध किया है। कुछ का मानना है कि सरकार बीसीसीआई अध्यक्ष सौरभ गांगुली और बोर्ड सचिव जय शाह को राहत देने के लिए कोड में कार्यकाल और कूलिंग-ऑफ पीरियड से संबंधित मौजूदा प्रावधानों को कम कर सकती है। दोनों अधिकारियों के कार्यकाल जुलाई 2020 में खत्म हो रहे हैं। रिजिजू बोले- BCCI बीच में कहां?हालांकि रिजिजू ने इस तरह की बातों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'बीसीसीआई को इस सब में क्यों लाया जाए? क्रिकेट एक ओलिंपिक खेल नहीं है। जहां तक कोड का संबंध है, मैं बीसीसीआई पर कोई ध्यान नहीं दे रहा हूं। यदि क्रिकेट एक खेल है, तो भारत में सभी खेलों को कोड का पालन करना होगा'
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