रूपेश रंजन सिंह, नई दिल्लीक्रिकेट के बाद भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय खेलों में से एक बैडमिंटन में हम दो ओलिंपिक्स से मेडल जीत रहे हैं। 2020 तोक्यो ओलिंपिक्स में भी शटलर्स से मेडल की उम्मीद होगी। आज चर्चा 2020 में भारतीय बैडमिंटन प्लेयर्स की चुनौतियों पर... गिरा है ग्राफ पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बैडमिंटन का ग्राफ तेजी से उठा। हालांकि साल 2019 में यह ग्राफ थोड़ा नीचे गिर गया। विमिंस कैटिगरी में साइना का जनवरी में इंडोनेशिया मास्टर और का अगस्त में वर्ल्ड चैंपियनशिप खिताब निकाल दें तो भारतीय प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। वहीं मेंस सिंगल्स में बी साई प्रणीत का वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल हटा दें तो कोई भी भारतीय मेंस शटलर सुपर 300 कैटगिरी से ऊपर का टूर्नमेंट इस साल नहीं जीत सका। ओलिंपिक्स का चैलेंज पूर्व जूनियर वर्ल्ड नंबर 1 लक्ष्य सेन ने साल 2019 की शुरुआत वर्ल्ड रैंकिंग्स में 109वें स्थान से की थी, लेकिन साल खत्म होते-होते वह 32वें नंबर पर पहुंच गए। वह सौरभ वर्मा, पी कश्यप, के श्रीकांत और एचएस प्रणॉय के साथ तोक्यो ओलिंपिक्स के लिए क्वॉलिफाइ करने की दौड़ में भी शामिल हो गए हैं। मेंस सिंगल्स में दो प्लेयर्स क्वॉलिफाई करेंगे। वर्ल्ड रैंकिंग्स में 11वें स्थान पर काबिज बीसाई प्रणीत की सीट पक्की नजर आ रही है। लड़ाई एक सीट की है। लक्ष्य ने पिछले छह महीनों में प्रदर्शन किया है, अगर अगले चार महीनों में वह इसे दोहराने में सफल रहे तो फिर शायद तोक्यो में वह भारत की उम्मीद बनकर उतर सकते हैं।
- 18- ओलिंपिक्स गोल्ड हैं चीन के पास बैडमिंटन में, भारत को पहले गोल्ड का इंतजार।
- 11- देशों ने ही अभी तक ओलिंपिक्स में बैडमिंटन का कोई न कोई मेडल हासिल किया है।
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